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Wednesday, November 26, 2014

अश्क-ए-महबूब



अश्क-ए-महबूब हूँ बिखरने से ना रोके कोई
गर बिखर जाऊँ तो दामन में ना समेटे कोई।
काँप उठते हैं यह सोच के सन्नाटे भी अक्सर...
लेकर मेरा नाम मुझ को ना पुकारे कोई... ।
जिस तरह ख़्वाब मेरे टुकड़ों में बिखर गए हैं
इस कदर टूट के अब कभी ना बिखरे कोई।
एक मुद्दत से कोई दस्तक नहीं है दरवाजों पर
किस के इंतज़ार का दीया अब दिल में जलाए कोई।
मैं तो उस दिन को सोच के खौफजदा हूँ अब तक
ख़ुश्क फूलों की तरह किताबों में ना रह जाए कोई।
© 'रश्मि अभय' (26.11.2014)

Friday, November 21, 2014

भीनी सी खुशबू


गए मौसम की
भीनी सी खुशबू
यूं रगों में उतर आई है....
जैसे कोई अनदेखी सी छुअन
जिस्म में ऐसे असर कर जाए
जैसे सहरा की रेत में....
पहली बारिश....
ज़हन के हाथ में वो इस्म
जिसकी दस्तक ....
बंद दरिंचों को एक नज़ाकत से
ऐसे खोलेगी कि आँगन मेरा
हर दरींचे की अलग खुशबू से
छलक-छलक जाएगा.....!!!

*
इस्म-नाम

हाँ...मैं ‘रश्मि’ हूँ...


हाँ...मैं रश्मिहूँ...
सुबह से शाम तक
ख़ुद जलकर
रौशनी बिखेरती हुई
और फिर धीरे धीरे
शीतल हो जाना मेरी आदत है

ऊँचाई नभ सी
मगर मेरे लिये
जल-थल भी बराबर
फूलों पर पाँव मेरे
पंक से भी मेरी यारी
परियों सा जीवन मेरा
चाहती हूँ सबको सुनहरा
जननी से मिले संस्कार
बस बाँट रही हूँ
हर दुःख-सुख के साथ...

कितनी ही बाधाओं को पार किया मैंने
पर एक पल भी नहीं भूली अपना वजूद
मैं हूँ...यहीं हूँ...
काली घटाएँ कब तक
रोकेंगी मेरी राह
कितने ही तूफान आये
और कितनी रातें
मगर हर सुबह का अहसास
हुआ है मेरी चमक के साथ


Thursday, November 20, 2014

अनकहा..........

बहुत कुछ कहा अनकहा 

रह गया था...

हमदोनों के बीच

वो भाव जिन्हें तुम 

निगाहों से नहीं समझ सके

उन्हें भला शब्दों में क्या समझ पाते

बस एक चुप्पी रह गई थी

जो चीख़ रही थी

मैंने उसकी आवाज़ को अनसुना कर दिया

जानती थी थककर खामोश हो जायेगी

मेरी हीं तरह...

मैंने अपने अनछूए भावों को

एक पोटली में बांध कर

ताखे पर रख दिया...

ये सोचकर कि शायद कभी तुम

इसे समझ सको......!!!

'
रश्मि अभय' (३ अप्रैल २०१३,४:३० पी एम)
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ऐ ज़िंदगी....

ज़िंदगी.....कल देखा तुझको...
फिर से...एक बार बहुत करीब से....
वो मासूम सा बच्चा....
जो हाथों में गुब्बारा लिए....
उछल रहा था खुशी से....
तब देखा था मैंने उसकी आँखों में,
तुम्हें खिलखिला कर हँसते हुए....
ऐ ज़िंदगी फिर देखा तुझे करीब से....
देखा था उस औरत की आँखों में,
श्रद्धा बनकर झिलमिलाते हुए....
जो देख रही थी एकटक....
जलते हुए दीये की लौ को,
सच बताना...वो लड़का जो एयरगन से
शूट कर रहा था गुब्बारों को....
पास खड़े उसके उसके पापा के होंठों पर,
जो मुस्कान खिल उठी थी....
वो तुम हीं ना थी....???
ऐ ज़िंदगी फिर देखा तुझको करीब से....
आज सुबह सवेरे देखा तुझे....
बेटे के चेहरे पर सूकुन बनकर बिखरे हुए,
फिर देखा तुझे वारिश की बूंदों में....
भींगते और मचलते हुए....
'ऐ ज़िंदगी' देखा तुझे आज आईने में....
अपने सिंदूर की रेखाओं में....
दुआ बनकर उभरते हुए.....!!!

तेरी याद....

सूरज जब आँखें भी नहीं खोलता
और मेरे छत के मुंडेर पर
जब नन्ही चिड़िया चहचहाती है
ना जाने क्यूँ मुझे तब
तुम्हारी याद बहुत आती है....

याद आते हो तुम मुझे
सुबह की पहली किरण के साथ
तब अखबार पर निगाहें गड़ाए
चाय की हर चुस्की के साथ
पीती जाती हूँ मैं
तुम्हारे ना होने के एहसास को...

भोर के उजालों से शुरू होता
तुम्हारी यादों का सफर
रात के गहन अँधेरों में भी
अनवरत चलता हीं रहता है
उफ़्फ़...कितना लंबा है
तुम्हारी यादों का सफर...

रोज़ जिस मोड से शुरू होता है
उसी मोड़ पर आकार ठहर भी जाता है
बिलकुल इस धरा की तरह
जो सदियों से एक हीं धुरी पर सदैव गतिमान है
सच बताना...क्या मैं भी तुम्हें
इस कदर हीं याद आती हूँ ???

'एक अधूरा ख़त'

ता उम्र कुछ इस तरह लगी...
मुझे मेरी ज़िंदगी...
जैसे कोई अधूरा ख़त
अपने मुकम्मल होने की ख़्वाहिश में
मुझे आवाज़ दे रहा हो...
हाँ मैंने एक ख़त लिखा
एक अधूरा ख़त...मगर
अनकहे जज़्बात से जुड़ा
जिसमें मेरे दिल की हर धड़कन
एक शब्द है...और मेरी हर सांस
वो मात्रा जो उस शब्द को इक अर्थ दे
हर दिन जैसे कोई वाक्य
और मेरी ये ज़िंदगी कोई ख़त
'एक अधूरा ख़त'
यकीं मानो अगर कभी ये ख़त
तुम्हारे पास पहुँच जाता
तो मैं कभी भी किसी भाषा की
शब्दों की मोहताज ना होती
और मेरा अधूरापन खुद में
मुकम्मल होता....!!!

'रश्मि अभय' (11/11/2014)

वो शख़्स

वो शख़्स...
जिससे कभी मेरी तनहाई
बदनाम ना हुई...
ना जिसने कभी
मेरे अकेलेपन का
कोई अतिक्रमण किया
वो शख़्स...
जो मेरे साथ होकर भी नहीं है
जिसने मेरे इर्द गिर्द बुनी हुई
मेरी सीमाओं को इज्जत बख़्शी
जो मेरे उतना हीं करीब आता है
जितना मैं बुलाती हूँ...
जिसने मुझको मेरे अंदर
जीने की इजाज़त दी
वो शख़्स...मेरी रूह से होकर
मेरे रगों में...
लहू बन कर बहता है...!!!